एक ही जिंदगी … आप इसे क्या बनाने जा रहे हैं ?

दिसम्बर 24, 2011 2 टिप्पणिया

टॉम पीटर्स , अपने बहुप्रशंसित पुस्तक ‘Re-Imagine‘ में एक साहसिक बयान दोहराते हैं:

आजीवन रोज़गार खतम हो गया है !

उनका मानना है कि जिंदगी भर एक ही नौकरी में रहनेवाले दिन खतम हो गये हैं | उनके मुताबिक इस विघटनकारी डिजिटल पीढ़ी में करियर को कई संगठनों के पार ‘वाह’ परियोजनाओं (‘WoW” projects) की एक श्रृंखला के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिये |

मैं पूरी तरह से उनके साथ सहमत हूँ और मुझे लगता है कि यह हम सब के लिये पहली और सबसे महत्वपूर्ण सबक है |  हम में से हर एक विद्यार्थी और हर पेशेवर इंसान को ये पाठ सीखना ज़रूरी है | मेरा कैरियर टॉम पीटर के बयान का एक वास्तविक जीवन उदाहरण है | मेरे कैरियर को देखकर किसी को भी हैरानी ज़रूर होगी | आप खुद ही देख लीजिये: पिछले दस सालों में मैंने नौ संघटनों (कम्पनियों) में काम किया है ! पुराणी पीढ़ी के लोग मेरे करियर को देखके मुझ पर भरोसा करना ही छोड़ देंगे | पर असलियत में मेरे इन नौ संघटनों में मैंने जो काम किया है, उसकी छवि आज भी उन संघटनों में मौजूद है | शिक्षा के क्षेत्र में मेरी समझ बुलंद होने का वजह येही नौ संघटन है और येही दस साल हैं | मुझे यकीन है कि मेरी भूमिकाओं से मेरे प्रत्येक संघटन, सहयोगी और विद्यार्थी पर भारी सकारात्मक प्रभाव पढ़ा है | सबसे संतोषजनक बात ये है कि हर भूमिका में मैंने एक ऐसी ‘वाह’ परियोजना पर काम किया है जो आज भी उस संघटन के अभिन्न अंग के रूप में जीवित है | आप में से कई लोग जो अपने करियर को नए सिरे से शुरू कर रहे हैं, इस डिजिटल युग में सफलता पाने के लिये ऐसे कई सबकों को सीखना ज़रूरी है | उनमे से कुछ यहाँ प्रस्तुत करता हूँ |

करियर के पहले दो वर्ष हमेशा परीक्षण और त्रुटि |

मेरे पास करियर के मार्गदर्शन के लिये आनेवाले विद्यार्थियों में अस्सी फीसदी एक ही सवाल लेकर आते हैं:

क्या मेरे लिये यह नौकरी सही है?

वो ज़माना गया जब किसी कि पहली नौकरी ही उसकी जिंदगी भर की नौकरी हुआ करती थी | इस डिजिटल युग में करियर के पहले दो साल केवल परीक्षण और त्रुटि के लिये समर्पित होना चाहिये | जब तक आप अपने पसंदीदा काम एक बार भी नहीं करेंगे तो आपको कैसे मालूम पड़ेगा कि कौनसा काम आपको अच्छा लगता है ? इसलिये पहले दो साल में हर नए चीज़ या काम के लिये आप अपने आप को पेश कीजिये | हर चीज़ जो आपने पहले कभी किया नहीं है उसमें शामिल होने कि कोशिश कीजिये | कोई भी नया काम आपको सौंपा गया है तो खुशी खुशी उसे स्वीकार कीजिये | हर नए काम में ज़रूर कोई सीख होगी और हर सीख से आपका करियर बेहतर होता है | सफलता और विफलता का डर छोडिये और जी जान लगाकर काम करिये | ध्यान में रखिये – करियर के शुरुआत में विफलता आपका पूरा करियर विफल होने से आपको बचा सकता है |

जहाज़ों से खूदने का हिम्मत रखिये !

स्वेच्छा से जो मार्ग आप चुनते हैं वो मार्ग चुनौतियों से वंचित नहीं है | बहुत सारे लोग अपने इच्छा का काम करने में असफलतापूर्वक रहते हैं | इसके कई कारण हैं: कम वेतन, कम सम्मान, अधिक संघर्ष और अनिर्णय कि स्थिति | इन सभी चुनौतियों को नज़रंदाज़ करके सोचिये: हर दिन जब मैं घर लौटता हूँ, क्या लेकर आता हूँ – नाराजगी या संतुष्टि? अगर संतुष्टि चाहिये तो जहाज बदलने का साहस रखिये | देरी मत कीजिये वर्ना छूटी हुई जहाज को आप कभी पकड़ नहीं पाओगे |

विलम्ब एक करियर हत्यारा है !

मेरे कई ऐसे दोस्त और पुराने सहकर्मी है जिनका जूनून कहीं और है पर अपने अपने नौकरियों पर घ्रुनापूर्वक बंधे हैं | उनमें से कई लोगों का उल्लेख है कि वे एक आरामदायक स्थिति के लिए पर्याप्त कमाने के बाद अपने जुनून के क्षेत्र में काम करने के लिए स्थानांतरित करना चाहते हैं | दुर्भाग्य कि बात ये है कि ऐसा कभी होता ही नहीं | जैसे जैसे लोग करियर कि सीढ़ीयों पर ऊपर चढ़ते है, जैसे जैसे उनका मुआवजा बढ़ता है,  वैसे वैसे उनके चाहत और जरूरत भी वृद्धि हो जाते है | जिस आरामदायक स्थिति कि वो कल्पना करते हैं वो कभी आता ही नहीं और उनके जूनून  केवल एक इच्छाधारी सोच बनकर रह जाती है | कभी वास्तविकता में संभव नहीं होता | इसलिये करियर के मामले में विलम्ब और देरी न सिर्फ एक करियर हत्यारा है बल्कि उससे बढ़कर एक जुनून हत्यारा बन जाता है | यदि आपने  अपने जुनून के क्षेत्र को पहचान लिया है, तो खुदने में देरी नहीं करिये |  अब फ़ैसला ले ही लीजिये !

व्यक्तिगत जीवन और कार्य जीवन में संतुलन ज़रूरी |

इस एक नियम को मैंने अपने जिंदगी में अटूट पालन किया है और इससे मेरी सफलता पर कोई बुरा असर नहीं पढ़ा है | दिन में सिर्फ आठ घंटे काम करने से आप काम में और निजी जिंदगी में भी बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं | अपने करियर के पहले दिन से ही इस नियम को पालन करने कि कोशिश कीजिये | लेकिन काम करने के उस आठ घंटे में आपका पूरा ध्यान काम पर ही केंद्रित होना ज़रूरी है | ऐसी दिनचर्या से आपके सहकर्मियों और वरिष्ठों को आपकी उपलब्धता के बारे में पूरी जानकारी होती है और बाकी काम तदनुसार अनुसूचित हो जाता है | काम करते समय बाकी महत्वहीन और अवांछित कार्यों को निकल फेंकिये और सुनिश्चित कार्य को समय पर पूरा करने कि कोशिश कीजिये  | आपके वरिष्ट सहकर्मी या आपके मालिक आपसे दफ्तर में आपकी जिंदगी गुज़ारने कि उम्मीद नहीं रकते – उनको समय पर काम खतम होने की चिंता है | आप भी उसी पर ध्यान दीजिये, काम खतम करिये और घर जाईये | घर पर परिवारवालों और दोस्तों के साथ समय बिताईये और अगले दिन ताजे दिमाग के साथ दफ्तर पहुँचिये | फेसबुक और गूगल में बात करने का काम शाम को घर पर कीजिये नाकि दफ्तर में | काम करते समय सिर्फ काम पर ध्यान दीजिये और घर में रहते समय पूरे होश और हवास से घर में रहिये |

हम सबको एक ही जीवन मिला है और इस जीवन का सदुपयोग करना ही हमारा मकसद होना चाहिये | पूरी जिंदगी में एक ही काम करना छोडिये | अपने जूनून भरे काम करिये और गर्व के साथ जिंदगी पर अपने मुहर लगाइये | नया वर्ष शुरू होनेवाला है | यह संकल्पों का समय है |

मेरे साथ एक संकल्प लीजिये:

इस साल मैं ऐसा कुछ नया करूँगा जो मैं बहुत दिनों से करना चाहता था पर  कभी कर नहीं पाया ! ऐसा कोई काम जो मेरे दिल के बहुत दिनों की ख्वाहिश है ! ऐसा कोई काम जिसमे मेरा जूनून भरा हुआ है ! इस साल ज़रूर करूँगा !

यह कोई कठिन संकल्प नहीं है | एक बार लेकर देखिये और हर साल इसे निभाने कि कोशिश करिये | दस साल बाद आप खुद अपने उपलब्धियों पर चौंका जायेंगे !

एक ही जिंदगी है | यह आपकी जिंदगी है | आप इसे क्या बनाने जा रहे हैं ?

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राष्ट्र निर्माण में कौशल उत्कृष्टता

दिसम्बर 23, 2011 4 टिप्पणिया
मैं एक सामाजिक उद्यमी हूँ | जनम  से मदरासी हूँ | पिछले आठ साल से मैंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया है | पर उनमे से ज्यादातर काम मैंने उत्तर भारत में  किया है | हिंदुस्तान की शिक्षा की स्थिति के बारे में मैंने सबसे ज्यादा मध्य और उत्तर भारत में सीखा है और ये ब्लॉग मैं अपनी उस सीख को समर्पित करता हूँ | 

हाल ही मैं मैंने एक नया अंग्रेजी ब्लॉग शुरू किया था … स्किल ट्रेन इंडिया के नाम से | इस ब्लॉग का एक मात्र मकसद है – हिंदुस्तान के छात्रों को शिक्षा, नौकरी और करियर में निष्पक्ष मार्ग दर्शन देना | जब मैंने इस बारे में मेरे एक भोपाल के मित्र को बताया तो उसने झट से ऐसा एक सवाल पूछा जो मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया | उसका सवाल था – भारत के सौ करोड़ की जनता में से बयालीस करोड़ लोगों की मातृभाषा हिंदी है | इसके अलावा तीस करोड़ लोग हिंदी समझते हैं और बोलते हैं | जब भारत के सत्तर फ़ीसदी लोग हिंदी समझते हैं तो मैं क्यों अंग्रेजी के पीछे पढ़ा हूँ ? उसका सलाह था कि मैं  हिंदी में लिखूं तो और भी बहुत ज्यादा लोगों को फायदा हो सकता है | उसकी बातों में जरूर सच्चाई थी | तो शुरू कर दिया स्किल ट्रेन इंडिया का हिंदी ब्लॉग | 


मार्गदर्शन देने में मैं अपने आप को बहुत बड़ा माहिर नहीं मानता | पर मुझे यकीन है की मैं इसमें अपने उपदेशकों, शिक्षकों, सहयोगियों, पुराने सहपाठियों, दोस्तों, परिवारवालों और विशेष रूप से मेरे कई छात्रों की मदद लेकर निष्पक्ष मार्गदर्शन देने में समर्थ रहूँगा | इस ब्लॉग को मैं एक संभाषण की तरह रखना चाहता हूँ जिसमे  सलाहों पर खुलकर विचार विमर्श हो | मेरे शैक्षणिक प्रयत्नों पर जितने लोगों ने मुझे मदद करना चाहा – आपसे मेरी गुज़ारिश है की आप इस ब्लॉग में अपने राय प्रकट करें | हो सकता है – आपकी एक राय किसीकि ज़िन्दगी बदल सकती है |


हर हफ्ते मैने एक टिप्पणी लिकने का निर्णय लिया है | हर टिप्पणी को मैं एक बत्ती का खम्भा (lamp post ) समझना चाहता हूँ | मेरी कोशिश यही है कि हर खम्भा किसी कि करियर के अँधेरे को दूर भगाए | अगर आप को लगे कि ये खम्भे फायदेमंद हैं तो कृपा करके इसके बारे में दूसरों को भी बताईए | दिल से शेयर करिये | हो सकता है – आपकी एक शेयर (फेसबुक हो या गूगल प्लस हो या लिंक्डइन हो) किसी के ज़िन्दगी में रोशनी दिला सकता है |


आपके टिप्पणियों और प्रतिक्रियाओं के लिये मैं सदैव आभारी रहूँगा | इनसे ज्यादा मुझे आपके प्रतिवादों की अपेक्षा है | प्रतिवादों से अलग नज़रिये मिलते हैं | हो सकता है – आपके प्रतिवादों से किसी छात्र को अपने करियर के लिये बिलकुल नया और अलग राह मिले |

इस ब्लॉग को मैं भारत निर्माण के लिये समर्पित करता हूँ – एक ऐसा भारत जो कुशल हो और जहां हर छात्र अपने इच्छा से अपना करियर चुने न कोई मजबूरी से | ऐसे होने से ही उत्कृष्टता हर भारतवासी का आदत बन सकता है नहीं तो वो सिर्फ अपवाद ही रह जायेगी | 


क्या आप ऐसे भारत निर्माण में मेरे साथ हैं? 

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